Ayodhya Live Report : After Bhumipujan, 10 times the crowd grew to see Ramlala,Sant said,now Ramrajya-like Atmosphere | भूमिपूजन के बाद रामलला के दर्शन के लिए भीड़ 10 गुना बढ़ी, एक दिन में 3 हजार से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके थे


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अयोध्याएक घंटा पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव/आदित्य तिवारी

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  • जन्मभूमि से सटे इलाकों के दुकानदारों में अफवाह, सड़क चौड़ी होगी तो प्रशासन उनकी दुकानें तोड़ देगा
  • दर्शन के लिए आए भक्त पारिजात को देख बात कर रहे हैं, यह पौधा कल पीएम ने लगाया था, वहां मौजूद पुजारी भक्तों को बता रहे हैं कि कल पीएम ने कहां साष्टांग प्रणाम किया था

यहां पिछले दो दिन भूमिपूजन को लेकर जो जश्न सा माहौल था, उसका शोर अब धीरे- धीरे कम होने लगा है। लोग काम पर लौट रहे हैं। बाजारों में भीड़ बढ़ रही है। हालांकि, राम की पैड़ी से लेकर हनुमान गढ़ी और जन्मभूमि तक भूमिपूजन के लिए अयोध्या आए लोग काफी ज्यादा संख्या में अब भी मौजूद हैं। सजावट उतारने का काम चल रहा है। साफ- सफाई करने और शामियाने समेटने का भी। साकेत ग्राउंड से लेकर जन्मभूमि के बीच रास्ते से फूल मालाएं और झालर हटाई जा रही हैं। लोग कह रहे हैं कि अभी पूरा साजो सामान हटाने में 2 दिन लगेंगे। इसके बाद शनिवार से निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।

चंपत राय ने परिसर का जायजा लिया

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बंसल ने गुरुवार को मंदिर निर्माण करने वाली एलएंडटी कंपनी के अधिकारियों के साथ परिसर का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि पहले नींव खोदने का काम होगा। बारिश की वजह से यह काम धीमा पड़ सकता है।

नींव भरने तथा ग्राउंड फ्लोर के काम में 18 महीने तक लग सकते हैं। ग्राउंड फ्लोर से ऊपर की दो मंजिल बनने में 14 से 18 महीने लगेंगे। फिनिशिंग में भी करीब छह महीने लगेंगे। इसमें 161 फीट के शिखर का काम भी शामिल है। मंदिर में पांच गुंबद का निर्माण होना है। मंदिर के निर्माण कार्य को पूरा होने में करीब साढ़े तीन वर्ष लग सकते हैं। मंदिर का डिजाइन फाइनल है। इसे क्लीयरेंस के लिए अगले सप्ताह अयोध्या विकास प्राधिकरण को सौंपा जाएगा।इसके लिए करीब दो करोड़ रुपए की राशि शुल्क के रूप में अलग से रखी गई है।

अयोध्या में गुरुवार को साफ-सफाई की गई। राम की पैड़ी पर सफाई करते लोग।

शाम 7 बजे तक 3 हजार से ज्यादा लोग रामलला के दर्शन कर चुके थे, 10 गुना बढ़ी भीड़
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्ट ऑफिस में ज्यादा भीड़ नहीं है। यहीं से भक्त रामलला के दर्शन के लिए जाते हैं। जब हम पहुंचे तो कुछ लोगों को लौटाया जा रहा था कि दर्शन का समय खत्म हो रहा है। भीड़ को देखकर विहिप के कुछ पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के ऑफिस से निकल कर अधिकारियों से बात की और दर्शन का समय शाम 7 बजे तक कर दिया।

यहीं हमारी मुलाकात कैलाश कनाडे से हुई जो महाराष्ट्र से दो दिन पहले अयोध्या पहुंचे थे। बोले- हम यहां 1992 से आ रहे हैं। चित्रकूट से जयनारायण अपने साथियों के साथ रामलला के दर्शन करने पहुंचे हैं। लॉकर में अपना सामान रखवाते समय वे बाकी मंदिरों का पता भी पूछ रहे हैं। जयनारायण कहते हैं कि मैं दो दिन से हूं। कल टीवी पर भूमिपूजन का कार्यक्रम देखा और आज मंदिरों में दर्शन कर रहा हूं। कोरोना काल मे क्यों चले आए इस सवाल पर कहते हैं यह ऐतिहासिक क्षण था तो कैसे नहीं आता। मन मानता ही नहीं।

कैलाश कनाडे महाराष्ट्र से रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आए हैं। वे यहां 1992 से आ रहे हैं।

रामलला के मंदिर जाने से पहले एक छोटी सी दुकान में प्रभुनाथ भक्तों को 20 रुपए में लॉकर की सुविधा देते हैं। प्रभुनाथ कहते हैं कि भैया सुबह से हम लगभग 1500 रुपए कमा चुके हैं। यह सब भूमिपूजन की वजह से हुआ है। उन्होंने बताया कि बाहर के जो लोग रुके थे, वो तो आ ही रहे थे, आज लोकल की भी ज्यादा भीड़ है। वहीं एंट्री पॉइंट पर बनी पुलिस चौकी के इंचार्ज के मुताबिक शाम 7 बजे तक तीन हजार से ज्यादा भक्त दर्शन कर चुके हैं। कमोबेश यही स्थिति हनुमानगढ़ी में रही, जहां 8 हजार लोगों ने दर्शन किए। सुबह दर्शन करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या ड्यूटी करने आए प्रशासनिक अफसरों की थी।लॉकडाउन के बाद जब से मंदिर खुला है तब से इतनी भीड़ कभी नहीं हुई है। कभी 50 तो कभी 150-200 लोग आए होंगे, लेकिन भूमि पूजन के बाद भीड़ बढ़ गई है।

मंदिर का माहौल जानने के लिए हम भी रामलला के दर्शन के लिए मंदिर की तरफ चल दिए। मोबाइल जमा कराकर तलाशी ली गयी और एक कॉरिडोर में भेज दिया गया। दोनों तरफ से जाली और ऊपर शेड के नीचे लगभग 100 मीटर चलने के बाद हम अस्थायी मंदिर में पहुंचे। जगह-जगह पुलिस लगी थी, अंदर भक्त रामलला के दरबार मे जय श्रीराम का नारा लगा रहे थे। कुछ पारिजात का पौधा देख कर बात कर रहे थे कि यही वो पौधा है जिसे कल पीएम ने लगाया था।

रामलला के दर्शन करने के बाद लौट रहे लोग। कल पीएम मोदी ने मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया था।

रामलला ने आज पीले रंग का वस्त्र पहना है। भक्तों से लगभग 10 कदम की दूरी पर रामलला विराजे थे। आने वाले भक्तों को पुजारी तुलसी मिला पानी और मिश्री दे रहे थे। हालांकि कोरोना की वजह से भक्तों को प्रसाद ले जाना मना है। वहां मौजूद पुजारी भी भक्तों को बता रहे हैं कि कल पीएम किधर से आए और किधर गए और कहां साष्टांग प्रणाम किया था। हालांकि, पुलिसकर्मी रामलला के सामने भीड़ लगाने से मना कर तुरंत भक्तों को आगे बढ़ा रहे थे।

रामलला से लौट कर हम हनुमान गढ़ी पहुंचे, जहां प्रसाद वाले ने प्रसाद देने के बाद बताया कि आज से कोरोना के चलते प्रसाद चढ़ना बंद हो गया है। प्रसाद बेचने वाले दीपक कहते हैं कि यहां कभी प्रसाद शुरू हो जाता है कभी बंद हो जाता है। पीएम के आने की वजह से प्रसाद चढ़ना बंद हो गया था लेकिन सुबह फिर शुरू हुआ और दोपहर में फिर बंद हो गया।

अयोध्या में इस समय उत्सव का माहौल है। दीवारों पर पेंटिंग्स की गई है। कल पीएम मोदी यहां भूमिपूजन कार्यक्रम में आए थे।

जब उनसे पूछा कि भूमिपूजन हो गया, अब क्या? तो उन्होंने कहा, यह अच्छा है कि राममंदिर बनेगा, लेकिन हम लोगों को उजाड़ने की तैयारी हो रही है। उन्होंने बताया कि चर्चा है कि अब सड़क के दोनों तरफ 12 मीटर रोड बढ़ेगी और यह अब 2 लेन रोड बनेगी। ऐसा होगा तो हमारी दुकान भी जद में आएगी।

वहीं खड़े त्रिलोक कहते हैं कि पीएम के आने से पहले एसपीजी ने रिहर्सल किया था, तो हनुमान गढ़ी के दरवाजे तक गाड़ी चली गई, लेकिन मुड़ नहीं पा रही थी तो गेट पर कई दुकानों को तोड़ने का फरमान जारी कर दिया गया। ऐसा हो जाता तो 20 दुकानें टूट जातीं। हमारे व्यापारी नेताओं ने प्रशासन से बात की। प्रशासन ने भी कोई विरोध न हो, इसे समझते हुए फिर पीछे से पीएम को ले जाने का प्लान बनाया। तब कहीं दुकानें बच पाईं।

तस्वीर हनुमान गढ़ी मंदिर के सामने की है। यहां के दुकानदारों को डर है कि मंदिर बनेगा तो सड़कों को चौड़ा करने के दौरान उनकी दुकानें टूट सकती हैं।

टेढ़ी बाजार चौराहे के रास्ते में आम दिनों की ही तरह खूब जाम देखने को मिला। कल यहां पूरी दोपहर सन्नाटा था। टेढ़ी बाजार से कुछ दूरी पर ही बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे हाजी महबूब का भी घर है। हालांकि, वह घर पर नहीं थे। वहां से लौटे तो सड़क किनारे तीन लोग बात करते मिले। उनके बीच यह चर्चा चल रही थी कि मुख्य सड़क 4 लेन बनने वाली है, इसलिए जो भी घर पीले रंग से जहां तक रंगा गया है वह तोड़ दिया जाएगा।

हरिश्चंद्र यादव कहते हैं कि हालांकि अभी तय नहीं है, लेकिन चर्चा है कि आस-पास के मोहल्ले, जिनमें टेढ़ी बाजार, रामकोट, वशिष्ठ कुंड भी शामिल हैं, इन्हें जन्मभूमि में शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि, उनके साथ खड़े मनोज कहते हैं कि अभी यह सिर्फ चर्चा है। इसीलिए आसपास के दुकानदार भी परेशान हैं और सबसे ज्यादा परेशान वो हैं जिनके पक्के मकान सड़क किनारे बने हैं। दरअसल, लोगों के बीच अफवाह फैली है कि सड़क दोनों तरफ 35 मीटर चौड़ी होगी। जिसके बाद दुकानदार बहुत डरे हैं। बावजूद इसके राममंदिर बनने की खुशी चरम पर है।

तस्वीर सरयू नदी की है। गुरुवार को लोगों ने यहां स्नान किया और फिर रामलला के दर्शन के लिए गए।

तुलसी पार्क के सामने इंद्रप्रकाश पांडेय की सड़क किनारे ही अस्थायी धार्मिक किताबों की दुकान है। बताते हैं कि लॉकडाउन की वजह से दुकान बंद थी, लेकिन भूमिपूजन का जब से माहौल बना है बिक्री बढ़ गई थी। पांडेय पूछते हैं कि क्या हमको मुआवजा मिलेगा या मुआवजा न दें तो कहीं दुकान ही दे दें।

राम की पैड़ी पर सरयू कल-कल कर बह रही है। कुछ लोग स्नान कर रहे हैं तो कुछ हाथ मे जल लेकर अपने ऊपर डाल कर ही शुद्ध हो रहे हैं। सुबह-सुबह 60 किमी दूर गोंडा से बाइक से अयोध्या आए राजेश कहते हैं कि हम भूमिपूजन वाले दिन ही आते लेकिन पुलिस आने नहीं दे रही थी। इसलिए आज माहौल देखने आए हैं। अभी रामलला का दर्शन भी करेंगे।

अयोध्या में इस समय लोगों के बीच जय श्रीराम नाम के झंडे का क्रेज है। लोग अपनी गाड़ियों पर लगा रहे हैं।

राजेश सरयू को एकटक निहारते हैं, फिर कुछ देर बाद आचमन करते हैं। कहते हैं, पहले यही जगह गंदी रहती थी। पानी की जगह कीचड़ रहता था। यहां बैठना तो दूर खड़े नहीं रहा जाता था, लेकिन 3 साल में बहुत कुछ बदल गया। राजेश कहते हैं कि अगर 84 कोस वाली योजना का विकास होगा तो हमारा इलाका भी थोड़ा बहुत विकसित हो जाएगा।

फैजाबाद से श्याम सिंह का परिवार भी अयोध्या घूमने आया है। श्याम कहते हैं कि भूमिपूजन को लेकर बहुत उत्सुकता थी। इसीलिए पूरा परिवार लेकर आ गए। कोरोना का डर नहीं है, ये सवाल करते ही उनकी पत्नी तपाक से कहती हैं, हम अपनी गाड़ी से आए हैं और किसी से मिलना थोड़ी न है।

महामंडलेश्वर हरिहरानंद मैनपुरी से रामलला के दर्शन के लिए आए थे। वे यहां से 500 जय श्रीराम लिखे हुए झंडे लेकर जा रहे हैं।

हनुमानगढ़ी मंदिर के पास एक संत से मुलाकात हुई। वो अपनी गाड़ी पर जय श्रीराम लिखा एक बड़ा झंडा लगवा रहे थे। मालूम हुआ मैनपुरी से आए ये संत 500 झंडे खरीदकर अपने साथ ले जा रहे हैं। कहते हैं वो भक्तों को बाटेंगे। उन्होंने कहा कि झंडे बेचनेवाला तिलकराम बहुत ज्यादा खुश है। कहता है 1 तारीख से ही झंडे बिक रहे हैं, यही तो रामराज है।

तिलकराम कहते हैं, जबसे भूमिपूजन के लिए लोग इकट्ठा होने शुरू हुए हैं हमने खूब झंडे बेचे हैं। साधु-संत झंडे खरीद कर ले जा रहे हैं। हनुमान गढ़ी वाली लाइन में लगभग दस दुकानें हैं। जहां 25 रुपए से 200 रुपए तक के झंडे हैं। लोग कार और मोटरसाइकिल के लिए खूब खरीद रहे हैं। तिलकराम तो भूमिपूजन के दूसरे दिन 12 बजे तक हजार रुपए कमा चुके हैं।

तस्वीर कारसेवक पुरम की है। कार्यालय के बाहर दिवंगत अशोक सिंघल की तस्वीर लगी है।

कारसेवक पुरम के कार्यालय में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी मौजूद हैं। कार्यालय में सुबह से ही अयोध्या आए लोगों का मिलना और प्रसाद लेकर जाने का सिलसिला जारी है। कार्यालय में करीब 50 लोग व्यवस्था में अभी भी लगे हुए हैं। अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता भी कारसेवक पुरम कार्यालय में मौजूद हैं। व्यवस्था में लगे लोगों की जिम्मेदारी और चिंता इस बात की हो रही है कि प्रसाद हर घर तक पहुंच जाए। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता कहते हैं कि मुझे अशोक सिंघल जी के भतीजे सलिल और बहू को पूजन में लाने और पहुंचाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी में लगाया गया था।

कारसेवकपुरम कार्यालय के कमरे के बाहर रखी अशोक सिंघल की फोटो को दिखाकर लोग आपस में चर्चा कर रहे हैं। चार पहिया वाहनों से लोगों का आना जारी था। इसी बीच सैनिटाइज करने वाले ने वहां बैठे सभी लोगों को उठा दिया और वह कार्यालय के उन सभी स्थानों को सैनिटाइज कर रहा था जहां भी लोग बैठे थे। मीडिया कर्मियों की संख्या कम थी जो पूरे मामले पर नजर बनाए हुए थे।

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