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  • अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या तिथि पर बिल्व पत्र नहीं तोड़ना चाहिए, शिवजी का ही स्वरूप है बिल्व वृक्ष

दैनिक भास्कर

Jul 07, 2020, 08:24 AM IST

अभी शिवजी का प्रिय सावन माह चल रहा है और इस माह में पूजा करते समय शिवलिंग पर कई तरह की पूजन सामग्रियां, फूल-पत्तियां विशेष रूप से चढ़ाई जाती हैं। इनमें बिल्व पत्र का महत्व काफी अधिक है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार बिल्व पत्र का वृक्ष घर के बाहर या आसपास हो तो कई वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। आयुर्वेदिक में भी इसका महत्व बताया गया है।

उत्तर-पश्चिम दिशा में लगा सकते हैं बिल्व वृक्ष

बिल्व का पौधे लगाना हो तो घर के उत्तर-पश्चिम कोण में लगाना शुभ रहता है। जिस घर मे बिल्व वृक्ष लगाया जाता है और रोज उसे पानी दिया जाता है, वहां रहने वाले लोगों के विचारों में सकारात्मकता बनी रहती है। उत्तर-पश्चिम कोण में वृक्ष लगाना संभव न हो तो इसे घर की उत्तर दिशा में भी लगाया जा सकता है।

कई दिनों तक बासी नहीं माना जाता है बिल्व पत्र

शिवलिंग पर चढ़ाया गया बिल्व पत्र बासी नहीं होता यानी एक ही बिल्व पत्र को धोकर अगले दिन फिर से पूजा में चढ़ाया जा सकता है। बिल्व पत्र को कई दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। ध्यान रखें हिन्दी पंचांग की अष्टमी, चतुदर्शी, अमावस्या और रविवार को बिल्व पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इन वर्जित तिथियों पर बाजार से खरीदकर बिल्व पत्र शिवजी को चढ़ा सकते हैं।

बिल्व वृक्ष का महत्व

शिवपुराण में बिल्व वृक्ष को शिवजी का ही रूप बताया गया है। इसे श्रीवृक्ष भी कहते हैं। श्री देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है। इस कारण बिल्व की पूजा से लक्ष्मीजी की कृपा भी मिलती है। इस वृक्ष की जड़ों में गिरिजा, तने में महेश्वरी, शाखाओं में दक्षायनी, पत्तियों में पार्वती, फूलों में गौरी और फलों में देवी कात्यायनी वास करतीं हैं। इसी वजह से इस वृक्ष का पौराणिक महत्व काफी अधिक है।



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