Strange India All Strange Things About India and world


  • Hindi News
  • National
  • Punjab Cm Amarinder Singh Writes To Pm Narendra Modi Over Madhya Pradesh Geographical Indication (Gi) Basmati Rice

जालंधर9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो- आज कैप्टन ने मोदी को जीआई टैगिंग के विरोध में पत्र लिखा है।

  • किसी क्षेत्र विशेष में विशेष गुणवत्ता और विशेषताओं के साथ उत्पन्न फसल को जियोग्राफिकल इंडीकेशन ऑफ गुड्स एक्ट 1999 के तहत होती है टैगिंग
  • भारत में हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर-प्रदेश और जम्मू और कश्मीर के कुछ क्षेत्र की बासमती की ही जीआई टैगिंग की जाती है

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मध्य प्रदेश के बासमती चावल की जीआई (जियोग्राफिकल इंडीकेशन) टैगिंग देने पर नाराजगी जताई है। बुधवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उन्होंने इस पर रोक लगाने की मांग की है। कैप्टन का कहना है कि जीआई टैगिंग से कृषि उत्पादों को उनकी भौगोलिक पहचान दी जाती है। भारत से हर साल 33 हजार करोड़ की बासमती चावल का निर्यात होता है। अगर जीआई टैगिंग व्यवस्था से छेड़छाड़ हुई तो इससे भारतीय बासमती के बाजार को नुकसान हो सकता है और इसका सीधा-सीधा फायदा पाकिस्तान को मिल सकता है।

दरअसल भारत में हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर-प्रदेश और जम्मू और कश्मीर के कुछ क्षेत्र में पैदा होने वाली बासमती की ही जीआई टैगिंग की जाती है। इन दिनों मध्य प्रदेश में पैदा हुए बासमती चावल को जीआई टैगिंग दिए जाने का मसला चर्चा में है। बासमती की जीआई टैगिंग करवाने के मध्य प्रदेश के दावे का कड़ा विरोध किया जा रहा है। न सिर्फ ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन इसके विरोध में है, बल्कि देशहित के मुद्दो पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है।

इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र के माध्यम से कैप्टन ने कहा है कि भारत में बासमती की खेती करने वाले किसानों और निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए वह अधिकारियों को जीआई टैगिंग की व्यवस्था में छेड़छाड़ करने से रोकें। जियोग्राफिकल इंडीकेशन ऑफ गुड्स (रेजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 1999 के तहत जीआई टैग उन कृषि उत्पादों को दिया जाता है जो किसी क्षेत्र विशेष में विशेष गुणवत्ता और विशेषताओं के साथ उत्पन्न होती है। भारत में जाआइ टैगिंग वाले बासमती को उसकी गुणवत्ता, स्वाद और खुशबू के लिए दी जाती है। हिमालय की तलहटी में बसे क्षेत्रों में इंडो-गेंजेटिक क्षेत्र में पैदा होने वाली बासमती का स्वाद और खुशबू की पहचान सारे विश्व में विख्यात है।

उन्‍होंने कहा है कि मध्य प्रदेश, बासमती का उत्पादन करने वाले इस इस विशेष क्षेत्र में नहीं आता, इसीलिए इसे पहले ही बासमती की जीआई टैगिंग के लिए शामिल नहीं किया गया था। मध्य प्रदेश को जीआइ टैगिंग में शामिल करना न सिर्फ जीआई टैगिंग एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन होगा, बल्कि यह जीआई टैगिंग के उद्देश्य को ही बर्बाद कर देगा।

पहले भी हाे चुका मध्य प्रदेश का दावा खारिज
मुख्यमंत्री ने हवाला दिया कि इससे पहले 2017-18 में भी मध्य प्रदेश ने जीआई टैगिंग हासिल करने का प्रयास किया था, लेकिन तब रजिस्ट्रार ने मध्य प्रदेश के दावे को इंटेलैक्चुअल प्रॉपर्टी अपीलेंट बोर्ड ने भी खारिज कर दिया था। मद्रास हाईकोर्ट से भी मध्य प्रदेश को राहत नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि मध्य प्रदेश के इस दावे पर भारत सरकार द्वारा गठित की गई कृषि विज्ञानियों की समिति ने भी इस दावे को खारिज कर दिया था।

0



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *