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14 दिन पहले

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  • संतान की, धन की और मान-सम्मान पाने की इच्छा सभी की रहती है, लेकिन इच्छाओं और परिवार के बीच उचित तालमेल बनाए रखना चाहिए

घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहे, इसके लिए परिवार और इच्छाओं के बीच सही तालमेल बनाए रखना चाहिए। अगर इन दोनों के बीच तालमेल बिगड़ता है तो जीवन में अशांति बढ़ने लगती है। इस संबंध में श्रीरामचरित मानस के उत्तरकांड में लिखा है कि मनोरथ यानी इच्छाएं एक कीट के समान हैं। इसकी वजह से जीवन में सबकुछ बिगड़ सकता है।

गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीरामचरित मानस के उत्तरकांड में लिखा है कि-

कीट मनोरथ दारु सरीरा, जेहि न लाग घुन को अस धीरा।

इसका अर्थ यह है कि मनोरथ यानी इच्छा एक कीड़े की तरह है और हमारा शरीर लकड़ी की तरह ही है। ऐसा धैर्यवान कौन है, जिसके शरीर में मनोरथ यानी इच्छा नाम का ये कीड़ा न लगा हो।

सुत बित लोक ईषना तीनी, केहि कै मति इन्ह कृत न मलीनी।

इस चौपाई का अर्थ यह है कि पुत्र यानी संतान की, धन की और मान-सम्मान पाने की इच्छाएं सभी की रहती हैं। इन तीन प्रबल इच्छाओं ने किसकी बुद्धि को मलीन नहीं किया यानी बिगाड़ा नहीं है। बड़े-बड़े विद्वान लोग भी इन इच्छाओं के चक्कर में उलझकर अपने जीवन को अशांत कर चुके हैं। इन तीन इच्छाओं की वजह से ही जीवन में कई तरह की परेशानियां बढ़ने लगती हैं।

घर-परिवार में ध्यान रखें ये बातें

अगर हम घर-परिवार में सुख-शांति और प्रेम बनाए रखना चाहते हैं तो हमें अपनी इच्छाओं और परिवार के सदस्यों के बीच सही तालमेल बनाकर रखना चाहिए। अगर ये तालमेल बिगड़ता है तो पारिवारिक जीवन गड़बड़ हो सकता है। इच्छाओं को पूरा करने के चक्कर में परिवार को न भूलें। सभी सदस्यों को पर्याप्त समय देना चाहिए। परिवार के साथ तालमेल अच्छा रहेगा तो बाकी सारी चीजें व्यवस्थित रह सकती हैं।

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