16 मिनट पहले

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फोटो इसी साल 5 जनवरी की है। ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने बगदाद में मिसाइल हमले में मार गिराया था। इसके विरोध में ईरान में कई दिन विरोध प्रदर्शन हुए थे।

  • ईरान की सरकारी मीडिया ने जनरल सुलेमानी की जानकारी अमेरिका को देने के आरोपी महमूद मुसावी को मौत की सजा देने की पुष्टि की
  • जनरल सुलेमानी ईरान में बेहद लोकप्रिय थे, इसी साल जनवरी में इराक में हुए मिसाइल हमले में उनकी मौत हो गई थी

ईरान ने देश के साथ गद्दारी करने वाले महमूद मुसावी माजिद को मौत की सजा दे दी है। माजिद पर आरोप था कि उसने देश के सबसे लोकप्रिय जनरल कासिम सुलेमानी के इराक में होने की जानकारी अमेरिका को दी थी। सरकारी मीडिया ने सोमवार को माजिद को सजा दिए जाने पुष्टि की। इससे पहले सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया था उसे कब सजा-ए-मौत दी जाएगी।

सुलेमानी को अमेरिका ने इराक के बगदाद एयरपोर्ट के करीब ड्रोन से मिसाइल दागकर मार गिराया था। उस वक्त सुलेमानी कार में बैठकर जा रहे थे। तब ईरान ने अमेरिका को बदला लेने की धमकी भी दी थी। 

माजिद को पिछले महीने सजा सुनाई गई थी
माजिद को पिछले महीने सजा-ए-मौत सुनाई गई थी। इसके बाद ईरान के कानून मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन इस्माइल ने कहा था “माजिद कुद्स सेना प्रमुख की लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी हमारे दुश्मन अमेरिका को देता था। इसके बदले उसे अमेरिकी डॉलर मिलते थे। हमने उसे सजा-ए-मौत सुनाई है।” इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थी कि सजा पर जल्द अमल हो सकता है।  

रॉकेट हमले में हुई थी सुलेमानी की मौत

सुलेमानी ईरान की कुद्स फोर्स के प्रमुख थे। तीन जनवरी को वह सीरिया से इराक के बगदाद एयरपोर्ट पर पहुंचे। यहां वो एक कार में बैठे। कई और गाड़ियां भी उनके काफिले में थीं। इसी दौरान अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन से दागी गई मिसाइल उनकी गाड़ी से टकराई। हमले में सुलेमानी की मौत हो गई। ईरान में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक रहा। लोग सड़कों पर उतर आए। कुद्स फोर्स मुख्य तौर पर खुफिया एजेंसी है। ईरानी सेना में इसकी अलग यूनिट है। 

सुलेमानी की मौत की गहन जांच का दावा

सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने की धमकी दी थी। आमतौर पर सुलेमानी की यात्राएं बेहद गुप्त होती थीं। लेकिन, उनके बगदाद में होने की जानकारी अमेरिका को मिल गई। ईरान का दावा है कि उसने सुलेमानी की मौत के मामले में गहन जांच कराई। इसमें कुछ लोगों पर शक हुआ। जांच के बाद माजिद को दोषी पाया गया। हालांकि, केस और सुनवाई की जानकारी कभी सार्वजनिक नहीं की गई। माजिद पर एक आरोप इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद करने का भी था।

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