लैंगिक भेदभाव के कारण दुनियाभर में हर साल लापता होने वाली अनुमानित 12 लाख से 15 लाख बच्चियों में से 90% से 95% चीन और भारत की होती हैं।


  • यूएनएफपीए की ‘वैश्विक आबादी की स्थिति 2020’ रिपोर्ट में बताया गया है कि 50 साल में लापता महिलाओं की संख्या दोगुनी हो गई है
  • भेदभाव से हर साल 12 से15 लाख बच्चियां लापता हो रहीं, 2013 से 2017 के बीच भारत में करीब 4.60 लाख बच्चियां हर साल जन्म के समय लापता हो गईं

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:03 AM IST

संयुक्त राष्ट्र. दुनियाभर में पिछले 50 साल में 14.26 करोड़ महिलाएं लापता हाे गईं। इनमें से एक तिहाई, यानी 4.58 करोड़ महिलाएं सिर्फ भारत की हैं। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक लापता महिलाओं की संख्या चीन और भारत में सबसे ज्यादा है।

यूएनएफपीए की ‘वैश्विक आबादी की स्थिति 2020’ रिपोर्ट में बताया गया  है कि 50 साल में लापता महिलाओं की संख्या दोगुनी हो गई है। 1970 में यह 6.10 करोड़ थी, जाे 2020 में 14.26 करोड़ हो गई। 2020 तक भारत में 4.58 करोड़ और चीन में 7.23 करोड़ महिलाएं लापता हुईं।

जन्म के बाद ही लापता हो जाती हैं बेटियां

प्रसव के पहले या प्रसव के बाद लिंग निर्धारण के कारण लापता लड़कियाें की संख्या भी रिपाेर्ट में शामिल है। इसके अनुसार 2013 से 2017 के बीच भारत में करीब 4.60 लाख बच्चियां हर साल जन्म के समय लापता हो गईं। एक विश्लेषण के अनुसार कुल लापता लड़कियों में से करीब दो तिहाई मामले और जन्म के समय होने वाली मौत के एक तिहाई मामले लिंग निर्धारण से जुड़े हैं। लैंगिक भेदभाव के कारण (जन्म से पूर्व) लिंग चयन के कारण दुनियाभर में हर साल लापता होने वाली अनुमानित 12 लाख से 15 लाख बच्चियों में से 90% से 95% चीन और भारत की होती हैं।



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