Responding to outbreak of corona infection by air, WHO replies to 239 scientists


  • डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जेसरेविक के मुताबिक, समीक्षा जारी लेकिन अभी हम आश्वस्त नहीं हैं कि गाइडलाइन में बदलाव होना चाहिए
  • वैज्ञानिकों ने कहा, आंकड़े सामने होने के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने वायरस की हवा में मौजूदगी को समझने की कोशिश नहीं की ​​​​​

दैनिक भास्कर

Jul 07, 2020, 01:57 PM IST

दुनियाभर के 200 से अधिक वैज्ञानिकों का खुला पत्र मिलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा, वह मामले की समीक्षा करेगा। 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ को पत्र लिखकर कहा था कि कोरोना वायरस हवा से भी फैलता है। अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना है कि बचाव के लिए चारदीवारी में भी एन-95 मास्क पहनने की जरूरत है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ से कोरोना वायरस पर दिशा-निर्देशों में बदलाव करने का भी आग्रह किया। 

5 पॉइंट : वैज्ञानिकों का पक्ष और डब्ल्यूएचओ का जवाब

समीक्षा जारी, अभी हम गाइडलाइन में बदलाव के लिए आश्वस्त नहीं
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जेसरेविक के मुताबिक, हम लेटर और रिपोर्ट से वाकिफ हैं। टेक्निकल एक्सपर्ट्स के साथ उसकी समीक्षा कर रहे हैं। हवा में मौजूद कणों (एयरोसॉल) से कोरोनावायरस कितनी तेजी से फैलता यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। हम संक्रमण के रास्ते यानी एयरोसॉल रूट को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अभी हम आश्वस्त नहीं हैं कि गाइडलाइन में बदलाव होना चाहिए। 

कब-कब हवा के जरिए फैलता है कोरोना
इस सवाल पर डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कुछ खास स्थितियों में हवा से कोरोना का संक्रमण फैलता है। जैसे मरीज को ऑक्सीजन के लिए ट्यूब लगाते समय। डब्ल्यूएचओ ने 29 जून को स्वास्थ्य कर्मियों के लिए गाइडलाइन जारी की थी। जिसमें कहा गया था कि कोरोना नाक और मुंह से निकले ड्रॉप्लेट्स से फैलता है। सतह पर मौजूद सतह से भी संक्रमण हो सकता है।
स्वास्थ्य कर्मियों को सलाह देते हुए कहा था कि मरीज को ऑक्सीजन ट्यूब लगाते समय और वेंटिलेटर के आसपास रहने पर एन95 रेस्पिरेंट्री मास्क लगाएं और सभी जरूरी इक्विपमेंट पहनें। 

डब्ल्यूएचओ की निराशा चरम स्तर तक पहुंची
मिनेसोटा यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. माइकल ऑस्टरहोल्म के मुताबिक, आंकड़े सामने होने के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने इंफ्लुएंजा वायरस की हवा में मौजूदगी को समझने की कोशिश नहीं की। इस समय हो रही बहस का यही हिस्सा है। डॉ. माइकल के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की निराशा का स्तर चरम पर पहुंच गया है।  

हवा में मौजूद कणों से संक्रमण फैलना सम्भव
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स के संक्रामक रोग सलाहकार प्रो. बाबक जाविद का कहना है कि हवा में मौजूद कणों से संक्रमण फैलना सम्भव है लेकिन हवा में वायरस कितने समय तक रहेगा, अब तक इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। अगर संक्रमित इंसान के किसी जगह से जाने के बाद भी यह वायरस हवा में लम्बे समय तक टिका रहता है तो स्वास्थ्य कर्मियों और आसपास मौजूद लोगों को अपनी सुरक्षा करनी होगी।

अगर यह दुर्लभ मामला हुआ तो अधिक असर नहीं पड़ेगा
हार्वर्ड स्कूल के महमारी विशेषज्ञ डॉ. विलियम हेनेज के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ हवा से कोरोना संक्रमण फैलने के हर पॉइंट की समीक्षा कर रहा है। इस बात को उसे गंभीरता से सोचना होगा। अगर हवा के जरिए कोरोना का संक्रमण फैलने की आशंका है और यह एक दुर्लभ स्थिति है तो इसका अधिक प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ेगा।



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