शांति केवल संघर्ष या हिंसा के अभाव का नाम नहीं, विश्व की शांति के लिए पहली आवश्यकता है व्यक्ति के भीतर शांति हो


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9 घंटे पहलेलेखक: श्रीश्री रविशंकर

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  • एक शांतिपूर्ण दुनिया को आकार देने के लिए, नैतिक मूल्यों की ओर बढ़ने का समय है

इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का विषय ‘मिलकर शांति का निर्माण’ बहुत उपयुक्त है। शांति केवल संघर्ष या हिंसा के अभाव का नाम नहीं है। यह एक सकारात्मक आंतरिक घटना है। जब हम विश्व शांति की बात करते हैं, तो हम एक आवश्यक सत्य को भूल जाते हैं। विश्व शांति या बाहरी शांति, व्यक्तियों में स्वयं के साथ शांति के बिना होना असंभव है।

आंतरिक शांति, शांत मन, तीव्र बुद्धि, भावनाओं में सकारात्मकता और हल्कापन, स्वस्थ शरीर, सदा सेवा के लिए तैयार हृदय और हमारे व्यवहार में दयालुता को इंगित करती है।

नैतिकता की आवश्यकता

एक शांतिपूर्ण दुनिया को आकार देने के लिए, नैतिक मूल्यों की ओर बढ़ने का समय है जो किसी भी मानव समाज का आधार बनते हैं। नैतिक मूल्य क्या हैं? दूसरों के साथ वह न करें जो आप अपने साथ होना नहीं चाहते हैं। यदि आप नहीं चाहते कि कोई आपके अभ्यास में बाधा डाले तो आपको दूसरों के अभ्यास में बाधा नहीं डालनी चाहिए। यदि आप किसी के द्वारा नुकसान नहीं पहुंचाया जाना नहीं चाहते हैं, तो आपको किसी और को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। हमें अपनी पहचान बनाए रखनी होगी और साथ ही दूसरों की पहचान का सम्मान करना होगा।

आंतरिक शांति से बाहरी शांति तक

आंतरिक शांति विश्व शांति की कुंजी है। यदि लोग अपने अंदर इस शांतिपूर्ण स्थान तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं तो बाहरी शांति एक वास्तविकता बन सकती है। आंतरिक शांति की इस खोज में, दुनिया की वास्तविक प्रकृति का ज्ञान मदद करता है – यह जानना कि सब कुछ बदलने वाला है, और सब कुछ बदल रहा है।

यह जागरूकता कि सब कुछ एक दिन खत्म होने जा रहा है, आपको मन की चिंतात्मक प्रवृत्ति से बाहर निकाल सकता है। अतीत में बहुत सी चीजें हुई हैं, कुछ सुखद और कुछ अप्रिय और वे सभी दूर हो गई हैं। जब आप देखते हैं कि सब कुछ बदल रहा है, सब कुछ विलीन हो रहा है, तब आप मजबूत, फिर भी कोमल और केंद्रित बने रहते हैं।

आत्मा को विविधता पसंद है

इस ग्रह पर केवल एक प्रकार का फल, एक प्रकार के लोग या एक प्रकार का पशु नहीं है। अतः हमें आत्मा को एक में सीमित नहीं करना है। आइए उन सभी का आदर, सम्मान और प्रेम करके सृजन की विविधता का आनंद लें। हम अक्सर ‘धार्मिक सहिष्णुता’ शब्द का उपयोग करते रहे हैं। मुझे लगता है कि ये शब्द अब व्यर्थ हो गया है। आप केवल उसी को सहन करते हैं जिसे आप प्रेम नहीं करते हैं।

समय आ गया है कि एक-दूसरे के धर्मों को अपने धर्म की तरह प्रेम करें। एक धर्म सिर्फ इसलिए महान नहीं है क्योंकि वह मेरा है; वह क्या है इस कारण बहुत अच्छा है। यह समझ जब उन सभी में निहित होगी जो आध्यात्मिक और धार्मिक प्रकाश में लोगों का नेतृत्व करते हैं, तब यही हमारी सुंदर दुनिया में चल रही कट्टरता को समाप्त कर देगी।

जीवन के बारे में एक व्यापक दृष्टि को शामिल करने के लिए हमें अपने लोगों को हर दूसरे धर्म और संस्कृति के बारे में थोड़ा शिक्षित करने की आवश्यकता है। ध्यान और सार्वभौमिक भाईचारे के बिना, जो आध्यात्मिकता का सारभूत तत्व है, धर्म केवल एक बाहरी कवच ​​के रूप में रहता है।

हमें केवल इतना करना है कि हम शांति के भंडार की खोज करें जो कि हम हैं। शांतिपूर्ण लोग एक शांतिपूर्ण, सुंदर दुनिया का निर्माण करेंगे जहां विविधता, दयालुता और सेवा का सम्मान किया जाता है।

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