पुलिस को सूचना मिली थी कि दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास बदरपुर में विकास एक होटल में था। इसके बाद यहां छापा मारा गया।


  • हत्याकांड से पहले शहीद डीएसपी देवेंद्र ने अनंत देव त्रिपाठी को खत लिखकर विकास दुबे और चौबेपुर थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग की थी
  • दिल्ली के बदरपुर के होटल में विकास के दिखने की सूचना मिली थी, 3 लोग गिरफ्तार; अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं

दैनिक भास्कर

Jul 07, 2020, 11:45 PM IST

कानपुर. कानपुर हत्याकांड की जांच कर रहे एसटीएफ के डीआईजी अनंत देव त्रिपाठी को सरकार ने हटाकर पीएसी भेज दिया है। हत्याकांड में शहीद हुए डीएसपी देवेंद्र का एक खत सामने आया था। यह खत तत्कालीन कानपुर एसएसपी अनंत देव को लिखा गया था। इसमें कहा गया था कि चौबेपुर के थानेदार विनय तिवारी, विकास दुबे को बचाने का काम कर रहे हैं और इन पर कार्रवाई की जाए।

डीएसपी देवेंद्र के भाई ने कमलकांत ने भी अनंत देव पर आरोप लगाया था कि पत्र पर कार्रवाई नहीं की गई। अब त्रिपाठी की जगह पीएसी आगरा के सेनानायक सुधीर कुमार सिंह को एसटीएफ एसएसपी बनाया गया। मामले की जांच यही करेंगे। इसके अलावा पूरे चौबेपुर थाने के 55 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

दिल्ली के बदरपुर में होटल में छापा

दिल्ली के बदरपुर के एक होटल में विकास और उसके साथियों के छुपे होने की सूचना के बाद पुलिस ने छापा मारा। होटल के रिसेप्शन और बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज में विकास दुबे जैसा दिखने वाले एक व्यक्ति की फोटो भी सामने आई है। यहां से तीन लोगों को पकड़ा गया है। उन्होंने यह कबूला है कि विकास उनके साथ था, लेकिन पुलिस ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है।

विकास ने गुर्गों के नाम पर जमीन खरीदी

विकास दुबे और पुलिस के बीच मुठभेड़ के 4 दिन पूरे हो चुके हैं। विकास का पांचवें दिन भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। उस पर अब तक ढाई लाख रु. का इनाम घोषित किया जा चुका है। यूपी एसटीएफ और कानपुर मंडल की 40 टीमें उसकी तलाश में लगी हैं। 

पुलिस टीम मंगलवार को उसके घर के मलबे की जांच करने पहुंची। यहां उसके हाथ कुछ सबूत लगे। मलबे से कई फर्जी आईडी और बम मिले हैं। फर्जी आईडी का इस्तेमाल विकास जमीनों की खरीद-फरोख्त में करता था। उसने अपने गुर्गों से संपर्क करने के लिए घर में ही वायरलेस कंट्रोल रूम बना रखा था।

विकास ने अपने गुर्गों, रिश्तेदारों और नौकर-नौकरानी के नाम से कई चल और अचल संपत्तियां खरीद रखी थीं। पुलिस की जांच के दायरे में अब बैंक और फाइनेंस कंपनियां भी आ रही हैं।

बिकरू गांव का आंखों देखा हाल

भास्कर की टीम मंगलवार को बिकरु गांव पहुंची। यहां हत्याकांड के बाद से अब तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। डर और आशंकाओं के बीच गांव की गलियां सूनी हैं। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। शनिवार को प्रशासन ने घर में बंकर बनाए जाने और असलहे छिपाकर रखे जाने की आशंका के चलते विकास का किलेनुमा घर ढहा दिया था, उसका मलबा अभी जस का तस पड़ा है। 150 पुलिसकर्मी गांव के चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद हैं।

20 घरों के पुरुष फरार हो गए

गैंगस्टर विकास दुबे के घर के रास्ते में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात है। इस सड़क पर आने-जाने वाले हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। यह पुलिस वाले अलग-अलग थानों के हैं, जिनकी ड्यूटी लगाई गई है। महिलाएं कुछ भी नहीं बोलती हैं।

बस यही बोला कि करीब 20 घरों के मर्द डर के मारे फरार हैं। घर में केवल औरतें ही हैं। यह कहते हुए हड़बड़ाहट में बुजुर्ग महिला घर की ओर बढ़ गई। आगे विकास के घर के आसपास जिन घरों से पुलिस टीम पर हमला किया गया था, वे सभी घर बंद मिले। 

गांव में विकास के नाम पर शिलापट।

जिस घर में डीएसपी की हत्या हुई, वह भी बंद पड़ा
विकास के घर के ठीक सामने उसके मामा प्रेम कुमार पांडेय का घर है। शुक्रवार सुबह पुलिस ने प्रेम प्रकाश और अतुल दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया था। प्रेम के घर में ही डीएसपी देवेंद्र मिश्र की हत्या की गई थी। अब यह घर वीरान पड़ा है। परिवार कानपुर चला गया है जबकि बेटा शशिकांत अभी भी फरार है। हालांकि, विकास के घर के सामने पुलिसवालों का जमावाड़ा लगा है, लेकिन ग्रामीण कोई नजर नहीं आया। 

पुलिस की कार्रवाई से डरकर भागे लोगों के घरों में लगे ताले।

विकास के घर के पीछे चहल-पहल
विकास के घर के पीछे बने घरों में जरूर चहल-पहल दिखी। महिलाएं गाय-गोबर हटाने का काम करती दिखीं। पुरुष और युवा घर के बाहर चहलकदमी करते मिले। हालांकि, कोई भी बात करने को राजी नहीं था। 
गांव के बाहर ही एक बड़ा-सा मैदान है। यहां बच्चे दिनभर कुछ न कुछ खेला करते हैं। मंगलवार को यहां सन्नाटा पड़ा था। मैदान में पुलिस की गाड़ियां खड़ी हैं। तालाब के किनारे कुछ घर बने हैं। वहां से भी मर्दों को पुलिस उठा ले गई है।

गांव में मुस्तैद पुलिसबल।

गांव की जातीय राजनीति को हवा देकर विकास ने दबदबा बनाया था
विकास का बिकरु गांव ब्राह्मण बाहुल्य है। इन परिवारों के लिए विकास मदद करने को तत्पर रहता था। गांव में पिछड़ी जातियां भी हैं। विकास इनकी भी हर दुख-दर्द में मदद करता था। इस वजह से विकास का गांव में सिक्का चलता था। लेकिन, गांव के ही कुछ मुस्लिम परिवारों से उसकी नहीं बनती थी।

गांव के ही एक बुजुर्ग ने बताया कि अपने अहाते में ही विकास कचहरी लगाकर गांव के छोटे-बड़े मामलों का निपटारा करता था। ब्राह्मणों और पिछड़ी जातियों का वोटबैंक भी अपने इशारे पर वह चुनाव में प्रयोग करता था। इस वजह से उसे राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त होता था।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Follow by Email
LinkedIn
Share
Instagram