चीनी सुअरों में मिला फ्लू का नया वायरस, G4 EA H1N1 नाम का ये वायरस भी कोरोना जैसी महामारी ला सकता है


  • चीनी वैज्ञानिकों ने वायरस को G4 EA H1N1 नाम दिया, कहा- यह 2009 में महामारी फैलाने वाले स्वाइन फ्लू जैसा
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्ट्रेन नया होने के कारण लोगों में इससे लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता या तो कम है या बिल्कुल नहीं है

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:01 PM IST

चीनी वैज्ञानिकों ने फ्लू के वायरस का वो स्ट्रेन खोजा है जो महामारी ला सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि फ्लू वायरस का एक ऐसा स्ट्रेन हाल ही में सुअर में पाया गया है, जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है। यह अपना रूप बदल (म्यूटेट) कर एक इंसान से दूसरे इंसान में पहुंचकर वैश्विक महामारी ला सकता है। 

सुअरों पर नजर रखने की जरूरत

वायरस का नाम G4 EA H1N1 है। इस पर रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि यह इमरजेंसी जैसी समस्या नहीं है लेकिन इसमें ऐसे कई लक्षण दिखे है जो बताते हैं कि यह इंसानों को संक्रमित कर सकता है, इसलिए इस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस के मुताबिक, यह नया स्ट्रेन है इसलिए हो सकता है लोगों में इससे लड़ने की क्षमता कम हो या हो ही न। इसलिए इससे बचने के लिए सुअरों पर नजर रखना जरूरी है। 

यह फैला तो रोकना मुश्किल होगा

कोरोना वायरस से पहले दुनिया में अंतिम बार फ्लू महामारी वर्ष 2009 में आई थी और उस समय इसे स्‍वाइन फ्लू कहा गया था। मेक्सिको से शुरू हुआ स्‍वाइन फ्लू उतना घातक नहीं था जितना कि अनुमान लगाया गया था। इस बार कोरोना वायरस के कारण 1 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। ऐसी स्थिति में अगर नया वायरस फैलता है तो इसे रोकना बहुत मुश्किल होगा।

इसमें इंसानों में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाने की पर्याप्त क्षमता

वैक्सीन के जरिए फ्लू के वायरस A/H1N1pdm09 को लोगों से दूर रखा गया लेकिन चीन में जो इसका नया स्ट्रेन देखा गया है वो 2009 में महामारी फैलाने वाले स्वाइन फ्लू से मिलता-जुलता है। शोधकर्ता किन-चो चैंग के मुताबिक, नया स्ट्रेन G4 EA H1N1 इंसान की सांस नली में पहुुंचकर अपनी कोशिकाओं की संख्या को बढ़ा सकता है। इसके अंदर ऐसा करने की पर्याप्त क्षमता है।

हंतावायरस : यह कोरोना से ज्यादा जानलेवा

  • हाल ही में चीन के युनान प्रांत में हंटावायरस की वजह से एक शख्स की मौत हो गई। शख्स शैंगडॉन्ग प्रांत से युनान आया था। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक, यह ऐसे समूह का वायरस जो खासतौर पर चीजों को कुतरने वाले जीवों (रोडेंट्स) से फैलता है जैसे चूहे और गिलहरी। 
  • अमेरिका में इस वायरस को न्यू वर्ल्ड हंता वायरस और यूरोव व एशिया में ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस के नाम से जाना जाता है। यह हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम नाम की बीमारी की वजह है। 
  • हंता वायरस के कई प्रकार हैं जो रोडेंट्स की अलग-अलग प्रजातियों से फैलते हैं। वायरस के वाहक चूहे के यूरिन, मल और लार के संपर्क में आने पर इंसान संक्रमित हो जाते हैं। 
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, हंता वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता फिर भी कोरोना वायरस के मुकाबले ज्यादा खतरनाक है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के मुताबिक, हंता वायरस भी जानलेवा है। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण मौत का ग्लोबल रेट सटीक तरह से पता लगने में कुछ वक्त लग सकता है। फिलहाल इसे 3-4% के बीच माना जा रहा है।

चीनी कोरोना की कहानी 

  • कोरोनावायरस का पहला मामला चीन में दिसंबर 2019 में आया था। हालांकि, अभी तक ये नहीं पता चल सका है कि किस दिन पहला मरीज मिला था। उसके बाद जनवरी के आखिरी दिन तक 10 हजार से भी कम मरीज थे। 
  • कोरोना संक्रमण से पहली मौत 9 जनवरी को चीन के वुहान शहर में हुई थी। चीन के बाहर इससे पहली मौत फिलीपींस में 1 फरवरी को हुई। जबकि, एशिया के बाहर पहली मौत फ्रांस में 14 फरवरी को दर्ज की गई।
  • कोरोनावायरस किस हद तक कहर बनकर उभरा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 जनवरी तक इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा करीब 300 तक था। लेकिन, उसके बाद के 4 महीनों के भीतर ही ये आंकड़ा 5 लाख के पार आ गया है।
  • फरवरी माह के आखिरी दिन तक मरीजों की संख्या 85 हजार से ज्यादा और मार्च के आखिरी दिन तक 7.5 लाख के पार पहुंच गई। उसके बाद अप्रैल तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 30 लाख से ज्यादा गई। 31 मई तक करीब 60 लाख मरीज हो गए और 27 जून तक दुनियाभर में संक्रमितों का आंकड़ा 1 करोड़ के ऊपर आ गया।



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